गठिया रोग क्यों हो जाता है?HealthPlanet

Posted on Tue 29th Nov 2022 : 16:32

हमारी हड्डियों के जोड़ों में ऊतक पाए जाते हैं। इन्हीं ऊतकों में से एक ऊतक जिसे कार्टीलेज के नाम से जाना जाता है वह हड्डियों के जोड़ों की फंक्शनिंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।जब व्यक्ति के शरीर में हलचल होती है अर्थात वह चलता है तो उसके जोड़ों पर काफ़ी दबाव पड़ता है। कार्टीलेज ऊतक ऐसी स्थिति में उस दबाव और प्रेशर को अवशोषित कर लेता है और हड्डियों को डैमेज होने से बचाता है। जब शरीर में कार्टीलेज उत्तकों की मात्रा में गिरावट होने लगती है तो ऐसे में शरीर गठिया का शिकार होने लगता है। इस प्रकार अर्थराइटिस का एक कारण शरीर में कार्टीलेज उत्तकों की कमी का होना है। इसी के साथ साथ जब किसी व्यक्ति को चोट लगती है तो ऐसे में हड्डियों पर काफ़ी प्रभाव पड़ता है। इससे ऑस्टियो आर्थराइटिस की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ये गठिया के एक सामान्य रूप का उदाहरण है।जब जोड़ों में किसी प्रकार का कोई संक्रमण या चोट होती है तो ऐसे में भी कार्टीलेज ऊतकों की संख्या कम होने लगती है। ये भी गठिया का कारण बनता है।

अर्थराइटिस की बीमारी वंशानुगत तौर पर भी देखने को मिलती है। यदि परिवार में कभी किसी को अर्थराइटिस की बीमारी रही है तो ऐसे में आने वाली पीढ़ियों में इस बीमारी की प्राकृतिक रूप से होने की संभावना काफ़ी अधिक हो जाती है।प्रतिरक्षा प्रणाली के सही से कार्य न करने की स्थिति में रूमेटाइट अर्थराइटिस जन्म ले सकता है। रूमेटाइट अर्थराइटिस ऑटो इम्यून डिसॉर्डर के फलस्वरूप होता है। ऑटो इम्यून डिसॉर्डर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र ही शरीर की कोशिकाओं और उत्तकों पर हमला करना शुरू कर देता है। जब प्रतिरक्षा तंत्र ऊत्तकों पर हमला करता है तो ऐसे में जोड़ों में पाया जाने वाला एक नर्म टिशू जिसे सिनोवियम कहते हैं वह काफ़ी ज़्यादा प्रभावित होता है। ये सिनोवियम नामक नर्म टिशू शरीर में एक लिक्विड बनाता है जिससे कार्टीलेज ऊतक को पोषण और नमी मिलती है।इस सिनोवियम नामक नर्म टिशू के डैमेज होने से लिक्विड की मात्रा का स्तर घटने लगता है। इससे कार्टीलेज ऊतक को पोषण नहीं मिल पाता। फलस्वरूप कार्टीलेज ऊतक प्रभावित होने लगता है।

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